जानीए सोशल मीडिया पर कौन कर रहा है सर्वोच्च न्यायधीश के ऊपर आपत्तिजनक टिप्पणी? कौन है देश के लिए खतरा! क्या भाजपा सरकार का संरक्षण है? सूरज कुमार बौद्ध ने अटॉर्नी जनरल को पत्र में क्या लिखा? अनिरुद्ध राम तिवारी और अजीत भारती के हैं बिगड़े बोल ?
मिशन अंबेडकर के संस्थापक सूरज कुमार बौद्ध ने अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर सीजेआई बी आर गवई पर कथित हमले की साजिश को भड़काने वाले दो व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगी है। पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है कि धार्मिक प्रवचक अनिरुद्धाचार्य अर्थात अनिरुद्ध राम तिवारी ने 6 अक्टूबर को हुए हमले से पहले एक आपत्तिजनक वीडियो जारी कर सीजीआई को धमकी दी थी।
वायरल वीडियो में अनिरुद्ध राम तिवारी भीड़ के सामने सीजीआई के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देते नजर आ रहे हैं।
इस बारे में पत्र में लिखित है – “21 सितंबर 2025 को सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अनिरुद्ध राम तिवारी ने कहा था “अगर छाती चीरवानी है तो बता दो।”, यह बयान विष्णु प्रतिमा मामले पर सीजेआई की टिप्पणियों के विरोध में दिया गया था जिसे देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था के खिलाफ हिंसा भड़काने की कोशिश माना गया।
आपको ज्ञात हो कि पूर्व में ही सीजेआई रामकृष्ण गवई ने बीते 18 सितंबर 2025 को ही स्पष्ट किया था कि उनकी टिप्पणियां पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकार क्षेत्र से जुड़ी थी और यांची करता की प्रार्थना न्यायालय नहीं मान सकता था।
युटुबर अजीत भारती पर भी संगीन आरोप
आपको ज्ञात हो कि सोशल मीडिया पर लगातार यूट्यूबर अजीत भारती द्वारा कथित तौर पर सीजीआई गवई के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की जा रही थी जिसका इस पत्र में भी सूरज कुमार बौद्ध द्वारा जिक्र किया गया है।
सूरज कुमार बौद्ध ने अपने पत्र में लिखा है कि हमले के दिन भी यूट्यूबर अजीत भारती ने अपने एक्स अकाउंट से चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट की थी जिसे अदालत और न्यायाधीशों के प्रति नफरत फैलाने की कोशिश की गई।
उन्होंने अपने पत्र में आगे लिखा है, “ऐसे बयान न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर करते हैं और न्यायाधीशों के निडर होकर कार्य करने में बाधा उत्पन्न करते हैं। ऐसी घटनाएं भारत की न्यायिक इतिहास में अभूतपूर्व है।”
6 अक्टूबर 2025 को भारतीय सुप्रीम कोर्ट में 71 वर्षीय वकील ने सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश पर सुप्रीम कोर्ट में जूता फेंकने की कोशिश की थी, जिसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें तुरंत पकड़ लिया, और उसे बाहर कर दिया। बाद में उसे छोड़ दिया क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने मुकदमा दर्ज करने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ अब तक का यह सबसे आपत्तिजनक हमला माना जा रहा है और इस आपत्तिजनक कार्य को वकील राकेश किशोर द्वारा किया गया। बाद में बार काउंसिल आफ इंडिया ने हमलावर वकील की लाइसेंस निलंबित कर दी।
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई पर हुए हमले के बाद, सभी राज्यों सहित देश की तमाम जनता और बड़े-बड़े नेताओं ने आपत्ति जताई। देशभर में जगह-जगह इसके खिलाफ प्रदर्शन हुए।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विपक्ष के नेता राहुल गांधी, पूर्व मुख्यमंत्री बसपा सुप्रीमो मायावती जी, मल्लिकार्जुन खड़गे सहित अन्य नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के साथ एकजुटता दिखाई, और और घटना की निंदा की। इसके साथ – साथ कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी सीजेआई के साथ अपनी सहमति दिखाई जैसे कि स्टालिन, पिनाराई, विजयन, सिद्धारमैया, रेवंत रेड्डी, ममता बनर्जी आदि।
पत्र में आगे उल्लेख है, “यदि ऐसे व्यक्तियों को न्याय के दायरे में नहीं लाया गया तो न्यायपालिका की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की नींव खतरे में पड़ जाएगी। किसी भी न्यायधीश को डर या पक्षपात के बिना अपने कर्तव्यों का पालन करने से रोक नहीं जाना चाहिए।”
सूरज कुमार बौद्ध ने भारत के अटॉर्नी जनरल से धारा 15 अवमानना न्यायालय अधिनियम 1971 के तहत आपराधिक अवमानना की कार्यवाही की अनुमति मांगी है।
आज जब यह समाचार लिखी जा रही है तब तक देश की भाजपा सरकार द्वारा ऊपर उद्धत आपत्तिजनक भाषा व पोस्ट लिखने वाले व्यक्तियों के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं हुई है जिससे जनता में भाजपा सरकार के प्रति काफी रोष है।
देश भर में इसके खिलाफ प्रदर्शन जारी है। बिहार राज्य जहां वर्तमान में बिहार विधानसभा चुनाव होने है वहां भी भारी विरोध प्रदर्शन हो रहा है।